Monday, December 15, 2025

Monday, February 3, 2014

वक्त

वक्त,
तुम कहीं तो रुकते होगे सुस्ताने को
बेफिकर, आराम फरमाने को
नींद की गोद में सो जाने को
ख्वाब दो-चार पकड़ लाने को
वक्त, तुम कभी तो थकते होगे...

4 फरवरी 2014 (5:10 am)

Friday, January 3, 2014

बोली

तुम्हारी जान पे आती है तो सांसें बचाते हो,
तुम अपनी आन को ऐसे में किस तरहा दबाते हो,
अरे इतना तो सोचो घर नहीं होगा तो क्या होगा!
देश बाजार में बैठा है, तुम बोली लगाते हो...

Sunday, February 12, 2012

दखल

शहर की रूह में कुछ इस कदर दखल देते हैं,
कि आदमी शहर की सूरत बदल देते हैं...

Thursday, December 8, 2011

हिंदी में कोलावरी डी


प्यार में इंतकाम क्यूं है??
वो जो दूर चांद चमक रहा है
यूं तो उसकी चांदनी मतवाली है
लेकिन ये रात बड़ी ही काली है
जिस तरह वो गोरी हसीना काले दिल वाली है
उससे नजरें मिलीं तो जिंदगी वीरान हो गई
अब तो बस मैं हूं और शराब है
आंखों में आंसू बेहिसाब हैं
इससे अच्छा होता जो मैं रहता अकेला
तू आई तो बन गई जिंदगी झमेला
मेरी महबूबा तूने मेरा प्यार ठुकराया
तेरी मासूम आवाज पर आज भी मेरा दिल आया
मैं मर-मर कर जिंदा हूं
फिर भी तू खुश है?
प्यार में नाकाम दिल यही गाता है
हमारे हाथ में कुछ भी नहीं आता है
फिर क्यू्ं प्यार में इंतकाम है??

(created at 12:00 pm, 9 Dec 11)

Friday, August 26, 2011

आज़ाद

हूं मैं आज़ाद लेकिन किस तरह आज़ाद कहिएगा!
कभी दो पल मेरे हालात पर कुछ गौर करिएगा,
उठे थे हाथ सबके तब मुझे आज़ाद करने को,
दबी आवाज क्यू्ं है आज मुझको फिर बचाने को?
हुए हो चौगुने तो 'मां' की ताकत घट रही क्यूं है?
उठे जब चौगुनी हुंकार, तब आज़ाद कहिएगा...

 2- लेकिन ये कहो...
मेहमान है भगवान, माना हमने लेकिन ये कहो,
घर उजाड़े जो उसे मेहमान कैसे रख लिया?
हो वतन के लाडलों, जो सच में तुम यारों अगर,
कसाब फिर दो दिन भी इस जमीं पे कैसे जी लिया!!

Friday, April 15, 2011

फालतू बातें...

मुझे नहीं कहना, मैंने क्या खोया, क्या पाया,
ना ही सुनना है कि तूने कैसे और कितना कमाया,
नहीं पूछना तूने कितने सुख-दुख झेले,
नहीं बताने अपनी जिंदगी के झमेले,

बता मुझे सूरज किस दरिया में डूब जाता है,
बारिश के लिए भगवान के पास इत्ता पानी कहां से आता है,
सतरंगी इंद्रधनुष के रंग क्यूं नहीं झरते हैं,
...चल न यार, आज फिर फालतू बातें करते हैं...